दबाकर आग सीने में एक मुद्दत से फिरता हूँ,
ये जो आजाद कर दूँ तो जलकर खाक हो जाऊं..
बड़ा बदनसीब सा लगता है मेरी दोनों ही मर्ज़ी में,
कि अब राख हो जाऊँ या फिर बर्बाद हो जाऊँ..??
Monday, 3 June 2019
बदनसीब
Wednesday, 10 January 2018
Saturday, 13 May 2017
तड़पती रूह
मेरे अश्कों की तू भी सौगात होगा
शब्द मेरे भी होंगे तू बेबाक होगा..
मेरी मोहब्बत का रंग लगता है फीका तो क्या
वफाओं के आगे मेरीे तू लाज़वाब होगा..||
अँघेरा दूर करने को मुझपर चिराग होगा,
रोशनी तो कम होगी मगर आफ़ताब होगा..
किस्सा लगता रहा हाल-ए-दिल मेरा जो
महफिलों की हर जुबां का वही सरताज़ होगा..||
दिन तो वो भी आयेगा जो मेरे साथ होगा
यादों को संजोया तुझपर भी गुलाब होगा..
मेरी तड़प से नही हूँ खुद मैं रूबरू
दिल में लगी आग की जलन का एहसास होगा..||
मेरे अश्कों की तू भी सौगात होगा
शब्द मेरे भी होंगे तू बेबाक होगा......||
( आदी )
Saturday, 18 February 2017
मेरी दुनिया
ख्वाहिशें बहुत हैं दिले नादां में मगर..
उम्मीदों से भरा गुलिस्तां भी बाकी है|
सफऱ लम्बा उलझनों भरा है मगर..
मेरे ख्वाबों की उड़ान अभी बाकी है|
दौर ए कठिनाई भी गुज़र जायेगा..
खुशनुमां वक्त से मुलाकात होगी|
हथेलियों में मेरा भी आसमां होगा..
मेरी सुबह की भी हसीन शाम होगी||
हथेलियों में मेरा भी आसमां होगा..
मेरी सुबह की भी हसीन शाम होगी||
(आदी)