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Thursday, 15 August 2019

हवायें

बड़ी ज़ोर से आती है,
मेरे चेहरे से टकराती है,
मेरे बालों को बिखराती है
ये हवा भी ना......
मन को कितना बहकाती है

कभी कुछह खुशबू साथ में लाती है
कभी कुछ यादों को बुलाती है
आनन फानन तेज़ कभी, कभी चूम के जाती है
ये हवा भी ना.....
मन को कितना बहकाती है!!

Sunday, 24 February 2019

मंजिल दूर

बिना संघर्ष के कोई जीत नहीं,
और जहां तुम रुक गए हो अंत समझ कर..
वो तो बस एक अंधे मोड़ का अंतिम कोना है,
रास्ता अभी और है, मंजिल अभी दूर है..
हर शख्स यहाँ लड़ रहा, हर एक यहां मजबूर है..

Sunday, 18 March 2018

निर्माण स्वयं का

रिश्ते निभाने के लिए होते हैं, यह कोई रण भूमि नही है जहां अपने पराक्रम का प्रदर्शन किया जाए। आज के नव युग मे हमारी तकनीक जितनी गतिमान हो रही है हमारा आपसी व्यक्तिगत संचार तथा भावों का आवागमन छीण होता जा रहा।। हम अपने भौतिक व्यक्तित्वों का तो विकास कर रहे परंतु अपनी असल पहचान तथा छवि को घुमिल कर चुके हैं। आज हम चाहते है जब खुद को टटोलना , अपने आंतरिक मस्तिष्क तथा हृदय की गहराई को तो वहां निर्वात के सिवा और कुछ नही और जो कर रहा है बेचैन दिन प्रतिदिन हमारे जीवन को वह तो बाह्य उलझनों का वह बगीचा है जो प्रारम्भ में आकर्षक और मोहक लगता है, जिसमे स्वयं जकड़े पड़े हैं हम क्योंकि बीच मे पहुंचने पर अंधकार व्याप्त है ।।
निकलने का पथ सीधा है क्योंकि निर्माण तो स्वयं हमें ही करना है, आवश्यकता है तो बस प्रारंभ की।। बाहर तो दूर तक प्रकाश है , उतना ही जितना हमारे अंदर भी व्याप्त है बस वह भी ओझल है हमारी दृष्टि से उन जंगलों के कारण.. जिनसे निकास का द्वार हम स्वयं बनाएंगे।।

(आदी)

Tuesday, 20 February 2018

मैं बस लिखता हूँ ..

अपने शब्दों के आकार के लिए लिखता हूँ,
कुछ अनकहे सपनो के साकार के लिए लिखता हूँ।
रह ना जाये कोई कमी मेरे अल्फ़ाज़ में,
है जो दिल के अंदर उन जज़्बात के लिए लिखता हूँ।।

कभी खुद के सम्मान के लिए लिखता हूँ,
कभी उनकी यादों के गुलिस्तान के लिए लिखता हूँ।
भर जाता है समंदर भावों का जब अंदर,
तब मैं उस प्यासी जमीं के अरमान के लिए लिखता हूँ।।

मैं तो हूँ एक बहता हुआ दरिया
कभी इस पार से लिखता हूँ कभी उस पार की लिखता हूँ......।।