ये कैसा सन्नाटा है, ये कैसी तन्हाई है ..??
कोई तो आशिक रोया है यहाँ,
ये कयामत तो दिल टूटने से आयी है.......
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Saturday, 25 July 2020
कयामत
Thursday, 15 August 2019
हवायें
बड़ी ज़ोर से आती है,
मेरे चेहरे से टकराती है,
मेरे बालों को बिखराती है
ये हवा भी ना......
मन को कितना बहकाती है
कभी कुछह खुशबू साथ में लाती है
कभी कुछ यादों को बुलाती है
आनन फानन तेज़ कभी, कभी चूम के जाती है
ये हवा भी ना.....
मन को कितना बहकाती है!!
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