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Sunday, 16 June 2019

हमारे घरोंदे

कैसा अजीब ये वक़्त कैसा बेबाक है
रात भी पूरी खत्म नहीं और सुबह भी होने को बेकरार है,
सुर्ख नहीं हैं पत्ते इन चंद दिखते पेड़ों पर
जबकि मौसम में तो बड़ी ज्वाला की मार है..

प्रकृति ने बेइंतहा कोशिश कर ली है खुद के वजूद को बचाने में,
हमने भी लेकिन पूरा घमासान किया है हर सुंदर संपदा हटाने में,
पूरी तरह बर्बाद कर दिया हमने अपने ही घरोंदों को,   ना प्रश्न करना अब प्राकृतिक आपदाओं के हमें मिटाने में..!!

सब हमारा अपना ही बोया है और अब हम ही इन कांटो को झेलेगे,
हमारे आने वाली पीढ़ी के बच्चे अब कहाँ हरियाली और प्रकृति की गोद मे खेलेंगे??

Saturday, 3 March 2018

माँ

इससे ज्यादा मुश्किल दुनिया मे कोई काम नही
पर इससे बड़ी उसके लिए उसकी कोई पहचान नही।

रात रात भर जगती है वो खुद की नींद का ज्ञान नही
सच है ये औरत के लिए माँ बनना आसान नही।।

सारी दौलत कम है उसको सारे शौक भी फीके हैं
बच्चा खुश हो वही काम का बाकी सब कसीदे हैं।

अपनी भूख के आगे उसके बच्चे का निवाला है
सब कुछ वहां पर छोटा है जहाँ माँ का हवाला है।।

अपनी पूरी पहचान को यूं भूल पाना आसान नही,
हाँ ये सच है कि इस दुनिया में माँ बनना आसान नही।।

(आदी)

दुनिया की सभी माँओं को समर्पित।।