नहीं है जो हकीकत, उसकी तलाश हूँ मै
बेकार सा जो था वीराने मे, तराश रहा हूँ मै,
मत आंको मुझे सिर्फ जो देखा उतने से मुझे
एक उफनते सागर का सारांश हूँ मैं!!
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Wednesday, 3 October 2018
सारांश
Wednesday, 10 May 2017
विद्रोही
हाहाकार मचा रखा है,
सुख चैन कहाँ अब पाऊँगा..
अब ऐसा ही हाल रहा तो,
मैं विद्रोही हो जाऊँगा..||
सीमा नही बची है फिर भी,
असीमित प्रेम दिखाऊँगा..
गर फिर भी न समझ सके तो,
मैं विद्रोही हो जाऊंगा..||
(आदी)
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