ख्याल वो जो सारी रात मेरी नींदों से टकरा रहा था,
कभी मैं सपनों के करीब था कभी सिर्फ सपने सजा रहा था ।
करवटे बदलना कभी तकिये को सीने से लगाना,
अब बस ऐसा करना मेरी रातों का काम हुआ जा रहा था ।।
बस अब छोटी सी हो गयी थी वो लंबी रातें,
और.....
किसी कहानी के बेचैन मोड़ सा मैं जिये जा रहा था,
किसी कहानी के बेचैन मोड़ से मैं जिये जा रहा था।।
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Saturday, 9 June 2018
रात और ख्याल
Friday, 22 September 2017
गहराई
दिल की गहराई भी अब कम रह गयी है ,
इंसानियत तो बस दिखावे की रह गयी है..|
क़त्ल कर देती थी आशिको को जो बिना वार के
वहां अब दिखती बस शिकन रह गयी है ..||
दिल की गहराई भी अब कम रह गयी है....
ख्याल जो आया था उसकी बस चुभन रह गयी है ,
बुझ चुके शोले के भीतर सी अगन रह गयी है..|
टूटे आईने से चकनाचूर हुए थे जो सपने
न भर सकेंगी वो दरारे बस इतनी सी उमर रह गयी है ..||
दिल की गहराई भी अब कम रह गयी है....
(आदी)
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